Sugar Nashini Ras
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Product Description
(सत्या शुगर नाशिनी रस) के आधार पर इस आयुर्वेदिक उत्पाद के सभी मुख्य घटकों (Ingredients) और विस्तृत फायदों (Benefits) की हिंदी सूची नीचे दी गई है:
मुख्य सामग्री (Ingredients)
इस रस के प्रत्येक 10 मिलीलीटर (10 ml) में निम्नलिखित प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं:
· करेला (Momordica charantia) – 500 mg
· जामुन (Eugenia jambolana) – 500 mg
· नीम (Azadirachta indica) – 125 mg
· मेथी (Trigonella foenum-graecum) – 125 mg
· गिलोय (Tinospora cordifolia) – 125 mg
· विजयसार (Pterocarpus marsupium) – 125 mg
· गुड़मार (Gymnema sylvestre) – 500 mg
· बिल्व पत्र / बेल पत्र (Aegle marmelos) – 250 mg
· आंवला (Emblica officinalis) – 100 mg
· अश्वगंधा (Withania somnifera) – 100 mg
· सोडियम बेंजोएट (सुरक्षित प्रिजर्वेटिव) – 50 mg
स्वास्थ्य लाभ और उपयोग (Benefits & Uses)
पैकेट पर दिए गए विवरण के अनुसार, इस रस के मुख्य औषधीय लाभ निम्नलिखित हैं:
· ब्लड शुगर नियंत्रण: यह खून में बढ़े हुए शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को कम और नियंत्रित करने में मुख्य रूप से कार्य करता है।
· हार्मोनल संतुलन: शरीर में हार्मोन संबंधी विकारों को दूर कर ग्लूकोज के स्तर को नियमित (Regulate) बनाए रखने में मदद करता है।
· डायबिटीज के दुष्प्रभावों को रोकना: शरीर में डायबिटीज (मधुमेह) के कारण होने वाले अन्य नुकसानों और जटिलताओं को रोकने में सहायक है।
· मूत्र रोगों में राहत: मधुमेह के कारण होने वाले विभिन्न मूत्र विकारों और बार-बार पेशाब आने की समस्या को दूर करता है।
· प्रमेह और सुजाक में लाभकारी: यह मधुमेह जनित प्रमेह या सूजाक (यौन संचारित विकारों से जुड़ी कमजोरी) को ठीक करने में सहायक है।
· कमजोरी और आंखों की रोशनी: डायबिटीज के कारण होने वाले मोटापे, आंखों की रोशनी की कमी, तथा शरीर की सामान्य कमजोरी व सुस्ती को दूर करता है।
· त्वचा संबंधी विकार: रक्त में शुगर की अधिकता के कारण होने वाली त्वचा की समस्याओं जैसे—बार-बार फोड़े-फुंसी होना, खुजली, चकत्ते और दाद आदि को ठीक करने में मदद करता है।
· लिवर स्वास्थ्य: यह लिवर (यकृत) के विकारों को दूर करने और उसे सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करता है।
· घाव और इन्फेक्शन से बचाव: हाथों, पैरों और गुप्तांगों के जख्मों व इन्फेक्शन (संक्रमण) को ठीक करने और उन्हें सड़ने से बचाने में सहायक है।
· हृदय स्वास्थ्य: यह हृदय की गति और उसकी कार्यप्रणाली को नियंत्रित व सुरक्षित रखने में मदद करता है।
· स्त्री रोग (Dysmenorrhea): यह महिलाओं में कष्टार्तव (मासिक धर्म के दौरान होने वाला गंभीर दर्द या अनियमितता) में भी उपयोगी है।
सेवन विधि और निर्देश (Dosage & Instructions)
· मात्रा: 10 से 20 मिलीलीटर (ml) दिन में दो बार पानी के साथ लें, या अपने चिकित्सक (डॉक्टर) के परामर्शानुसार सेवन करें।
· विशेष निर्देश: इस्तेमाल करने से पहले बोतल को अच्छी तरह हिलाएं (Shake well before use)। इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें।
अवधि: बोतल का ढक्कन खोलने के बाद इसे 2 महीने के भीतर इस्तेमाल कर लें।